फ्री वर्स
दिल है हमारा,
बहुत छोटा जैसा,
छोटा होना होगा तुम्हें,
पास आने के लिए,
ये बताओ,
और क्या सुनना है तुमको?
तुम्हारे दिल के अहाते में,
जाने क्या-क्या भरा है,
भीड़ है,जगह ख़ाली नहीं,
बेहतर है लौट जाना ही,
और देखो
लौट कर हम आगए,
और उधर अब देख कर
होगा भी क्या,
तुम समेटो फूल चम्पा के महज़,
तुम मगर अब कैक्टस
लगने लगे हो,
रेत रेगिस्तान की चेहरे पे है,
जब कभी फुरसत मिले
तो झाड़ लेना,
ये झुलसती
रेत रेगिस्तान की...
उर्मिला माधव,
4.5.2017
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