नज़्म पियें पहले तो पानी
उठकर प्रातःकाल पियें पहले तो पानी,
अपने सुन्दर मुख से बोलें,मधुरी बानी,
घर वालों संग बैठ,चाय की मारें चुस्की,
नहीं करें कोई फ़िक़्र ज़रा भी इसकी-उसकी,
खोलें कोई किताब ज़रा सा पढ़ भी लें कुछ
बिला वज्ह की गपशप में है नहीं कोई सुख,
अगर खेत हैं अपने तो फिर वहां भी जाऐं
पिता कृषक हैं उनका भी कुछ हाथ बटाएं,
घर में आकर घर वालों के पास बैठ लें,
गैरों की बातों से बिलकुल ध्यान खेंच लें,
इतना रख्खें व्यस्त स्वयम को थक जाने तक,
बहुत ज़ोर से नींद आएगी ,घर आने तक...
सिया वर राम चंद्र की जय...
😊😊😊😊😊
उर्मिला माधव,
10.5.2916
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