बचपन खा गए
सबसे पहले लोग हमारा बचपन खागए,
थोड़े बड़े हुए तो खाई तरुणाई
शब्द, किशोरी क्या होता है, क्या जानें,
डरे हुए थे कभी नहीं ली अंगड़ाई,
डांट सिर्फ़ खाते थे,अपनी सूरत पर भी,
इसीलिए घर देखा, देखी अंगनाई,
बहुत बचाया, हमको छोटे बालों ने,
कांधों पर ये ज़ुल्फ़ कभी ना लहराई,
अब बतलाओ इसके आगे क्या बाक़ी है,
फ़िर भी आधी बात न हमने बतलाई
उर्मिला माधव
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