जुदा उनसे होके
बहुत ग़मज़दा थे जुदा उनसे होके,
गुज़रती थी हर इब्तेदा उनसे होके,
मेरा इश्क़ था इन्तेहाई मुक़द्दस,
नहीं रह सका अलविदा उनसे होके,
बड़ी मिन्नतों से जिसे हमने भेजा
लो रूठा सा निकला ख़ुदा उनसे होके
कभी तंज गहरे,कभी जलते फिकरे,
ज़हर भरके लाये गदा, उनसे होके,
अजब वाक़या है,मुक़द्दर का देखो,
सुकूं भी मिला,गुमशुदा उनसे होके,
उर्मिला माधव
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