श्रद्धा सुमन

ये मेरे श्रद्धा सुमन अर्पित हैं अपने आप को,

सब तरह कठिनाइयों का सामना करते हुए,
अपने जीवन को जिया बिन याचना करते हुए,
एक सुखद संसार की बस कामना करते हुए,
मुश्किलों की हर डगर पर साधना करते हुए,

मैंने सम्मानित किया जीवन के हर अनुराग को
ये मेरे श्रद्धा सुमन अर्पित हैं अपने आप को,
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घिर गए आँगन में जब भी पीर के बादल घनेरे
अनवरत गहरे हुए जब यंत्रणाओं के अँधेरे,
अपने जीवन चित्र घर की भित्तियों पर ही उकेरे,
और प्रतीक्षा की,कभी तो आएंगे उजले सवेरे,
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अपनी आँखों में छुपा कर रख लिया संताप को,
ये मेरे श्रद्धा सुमन अर्पित हैं अपने आप को,

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