त्राहिमाम
इक ज़रा परदा हटाया, मुंह से निकला त्राहिमाम,
कारवां कुछ मुश्किलों का और अपना त्राहिमाम,
अपने एहसासों की दुनिया, दूर सबसे लेगए,
सोचते ही रह गए हम कैसे बचना त्राहिमाम,
हमने इक रस्ता निकाला ओढ़कर ख़ामोशियाँ
दिल भी करता कब तलक रोना बिलखना, त्राहिमाम,
उर्मिला माधव
Comments
Post a Comment