इजारा करते हैं
अब क्या बतलाएं दुनियां को,हम किसको इशारा करते हैं,
हर रोज़ वो चल कर आते हैं, हर रोज़ इजारा करते हैं,
घर दूर बहुत है,दूर सही,और मिलने से मजबूर सही,
आवाज़ लगाई जब हमने,आते हैं,इजारा करते हैं
रूपोश जिन्हें रख्खा हमने,वो आज तलक. रूपोश ही हैं,
हर रोज़ वो चल कर आते हैं हर रोज़ इजारा करते हैं
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