आदत रही है
मेरे हिस्से दिल की शहादत रही है
कोई मेरे दिल को न हसरत रही है
सुकूँ उम्र भर ही तलाशा है दिल ने,
बहुत खींचा तानी से नफ़रत रही है
किसी से कभी कोई ख़ाहिश न रख्खी,
यही ज़िंदगी भर की कसरत रही है,
कभी ज़िंदगी में बुलंदी कहां थी,
सो बस हार जाने की आदत रही है..
बचाया है दामन हमेशा ही अपना,
अदाओं से मुझको बग़ावत रही है,
जहां जिसको मौक़ा मिला दिल दुखाया,
मुझे कब किसी से शिकायत रही है..
उर्मिला माधव
Comments
Post a Comment