चटकते हुए रिश्ते...फ्री वर्स

चटकते हुए रिश्ते,
दरकती हुई दिल की दीवारें,
दिल की दीवारों में समाती हुई,
आंखों की नमी,
खोखला करती है बुनियाद को,
बुनियादें बोलतीं नहीं,
डोल जाती हैं,
इमारतें कांपने लग जाती हैं,
ढहती हुई सीमाएं,
टूटती हुई परंपराएं,
रेस्तरां की चमक से प्रभावित,
नई पीढ़ियां क्या जानें 
बुनियादों की गहराइयां,
जो गहराइयों में डूबी जाती हैं,
आभास नहीं होता, 
क्या खोता जाता है,
मर्म सोता जाता है
फिर क्या बचा 
यक्ष प्रश्न है,
कोई उत्तर है?
नहीं....
सिर्फ़ चुप्पी
उर्मिला माधव

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