कांच के गिलास हटा दो
ये कांच के गिलास हटा दो,
डर लगता है,टूट सकते हैं,
कांच बिखर सकता है,
चुभ जाएंगे टुकड़े,
एक अनचाहा घाव हो सकता है,
मुझे यहाँ काम करना है,
कांच की चीजें जल्दी हटाओ,
मेज़ साफ़ रखो
ऐसी चीजों से दूरी बनाये रखना ज़रूरी है,
हटा दूँ? क्योंकि तुम्हें डर लगता है?,
कितने कमज़ोर हो तुम !!
कितनी बहादुर हूँ मैं,
जिस कांच से तुम्हें डर लगता है,
वो तुम्हारे नाम की चूड़ियों की शक्ल में,
दिन-रात मेरी कलाइयों में रहता है,
और इन कांच की चूड़ियों के साथ,
सारे घर के काम,तुम्हारे खिलवाड़,
बीच-बीच में टूट कर
कलाई में चुभ,जाती हैं,
जानते हो ख़ून भी निकलता है,
तुम्हारी माँ देखती हैं और कहती हैं,
हाथ ख़ाली मत करना,
वरना अशुभ भी हो सकता है,
और तुमने भी तो कभी नहीं कहा,
ये कांच की चूड़ियाँ उतार दो,
मुझे डर लगता है कांच से,
शायद तुम भी इन चूड़ियों से जो मेरी ,
कलाइयों को घाव देती रहती हैं,
अपनी ज़िन्दगी से जोड़ कर देखते हो,
खूब सूरत बताते हो,
रंग बिरंगी हों या एक जैसे रंग की हों,
तुम्हें बहुत भाती हैं,
इनमें कांच नहीं दिखाई देता तुम्हें,
तुम इनमें देखते हो अपने आप को,
और मैं देखती हूँ मन ही मन
तुम्हारी ख़ास कमज़ोरी को
और कांच की चूड़ियों के साथ
निबाह करते हुए,
अपनी बहादुरी को...।।
#उर्मिलामाधव..
6.5.2015..
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