ज़िक्र लापरवाही का

क्या करूँ मैं ज़िन्दगी में ज़िक्र ला-परवाही का,
दिल किन्हीं रंगीनियों से पुरअसर होता नहीं,

जिसको देखो दौड़ता फिरता है अपने ढंग से,
मरहलों का रास्ता पर मुख़्तसर होता नहीं,
उर्मिला माधव ...

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge