ख़ुद को ख़ुदा समझना हो तो

ख़ुद को ख़ुदा समझना हो तो अपना एक मंदिर बनवा लो,
मुंह से जो कुछ कह नईं पाओ,उसके शिलालेख लगवा लो,
कोई बातों पर ध्यान न दे तो ,बस फ़ौरन बन्दूक उठालो,
इस पर भी ग़र होश न आये,तड़ से एक गोली चलवा लो,
अगर पडोसी रोता हो तो,गीतों की महफ़िल सजवा लो ,
ये ही परिभाषा इस युग की,तुम भी परचम हाथ उठा लो...
#उर्मिलामाधव ....
16.4.2015

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