ज़िंदगी की कोई भी औक़ात नहीं है

लगती रही है साथ सी पर साथ नहीं है,
इस ज़िंदगी की कोई भी औक़ात नहीं है,

ये मौत का वक़ार है लो देख लो मियाँ,
ख़ाली हैं दोनों हाथ, कोई बात नहीं है,

दूल्हा हो या दुल्हन हो नहीं फ़र्क़ है कोई,
अनहद बजे है इसलिए बारात नहीं है,

गद्दीनशीन बादशा हो या कोई दरवीश,
साँसें गिनी चुनी ही हैं इफ़रात नहीं है,
#उर्मिलामाधव...

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