ख़ुद आईने के आगे ज़रा पड़ के देखिए

खुद आईने के आगे ज़रा पड़के देखिये,
चेहरा किताब है तो ज़रा पढ़के देखिये,

गैरों पे हंस रहे हैं मियाँ बे-वज्ह ही आप ,
ख़ुद की भी फितरतों से ज़रा लड़के देखिये,

ख़ुरशीद के तले जो जला दूर है वो दश्त,
छत पर ही नंगे पाँव ज़रा चढ़के देखिये,

होती है कारगर भी दुआ दिलसे हो अगर
होगा यकीन जिद पे ज़रा अड़के देखिये,

बनती है बिगड़ी बात ज़रा कोशिशें करें
अपनी तरफ से खुद भी ज़रा बढ़के देखिये..

रख लीजिये तो दिलपे ज़रा हाथ साहिबान,
बाबस्ता अपने किस्सा कोई गढ़के देखिये,

कोई चला जो साथ में मुश्किल मुकाम तक,
ता-उम्र उसके प्यार को बढ़-चढ़के देखिये...
#उर्मिलामाधव..
7.4.2015

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