ग़म कुछ

हमसे देखा नहीं गया ग़म "कुछ",
इसलिए फ़ासला किया कम "कुछ"

अब जरा छुपके हमसे फिर देखो,
तब ये जानोगे अब गया दम "कुछ"

पर्दा दारी के हम भी क़ायल हैं,
कम न रखते हैं जी हया हम "कुछ"

क्या है अब हाल हमको बतलाओ,
दिल कहीं अब ज़रा गया थम "कुछ"?

उफ़ ग़ज़ब है अजीब फितरत है
फिर से आँखों में है नया नम "कुछ"..
#उर्मिलामाधव....
4.4.2015

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