दामन बचनाब ही होगा
हमें अपना दामन बचाना ही होगा,
नक़ाब अपने रुख़ पे गिराना ही होगा,
हमारी–तुम्हारी है मंज़िल जुदा अब,
सो अब दिल पे ताले लगाना ही होगा,
तुम्हें भूलने में मशक़्क़त है फिर भी,
ग़मे दिल को दरिया बनाना ही होगा,
कभी कोई शिकवा किया ही न हमने,
तो शिकवों के पीछे ज़माना ही होगा..
Comments
Post a Comment