चमक कर लौट गए
धीरे-धीरे सभी चमक कर लौट गए,
दुनियां वाले बहुत झिझक कर लौट गए,
उम्मीदों का दामन लेकर आए मगर,
ग़लत पते पर सभी भटक कर लौट गए,
शोर सुना था, वतन बदलना लाज़िम है
काँधे अपने सभी झटक कर लौट गए,
अब बर्बादी इससे बढ़कर हो भी क्या,
नौनिहाल सब पैर पटक कर लौट गए,
सब को रोक-रोक कर पूछा, क्या होगा,
तीस मार खां आए झिनक कर लौट गए..
उर्मिला माधव,
13.8.2018
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