कैसे बतलाएं क्या गुज़रती है
कैसे बतलाएं क्या गुज़रती है
ये अजब ज़िंदगी है, डरती है,
जब उदासी तुम्हारी आँखों की,
मुझसे मिलती है ऑ सिहरती है,
इक है आवाज़ मेरी दुनिया की,
तुमको देखे तो आह भरती है,
मुझपे इल्ज़ाम मत लगाया करो,
रूह बिस्मिल है ग़म से मरती है,
उर्मिला माधव
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