चुभा दे जो खंजर

नज़र नीची करके चुभा दें जो ख़ंजर,
ज़माने में उन सा न कोई सितमगर 

अगर दिल भरा हो हज़ारों ज़हर से,
वहां अपने सर को न हरगिज़ कलम कर,

जो मुश्किल में,बढ़कर सहारा नहीं दें,
तो मिलना, मिलाना, हर इक शै से कम कर 
#उर्मिलामाधव...
7.4.2015

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge