दिल नवाज़ो से रहेगी
ख़ास दूरी दिल नवाज़ों से रहेगी,
दोस्ती अब बे नियाज़ों से रहेगी,
लफ़्ज़ ही तो दिल हमेशा तोड़ते हैं,
अब मुहब्बत सिर्फ़ साज़ों से रहेगी,
सादगी में ज़ुल्म के क़िस्से बहुत हैं,
बरहमी क्या ख़ाक बाज़ों से रहेगी
जो भी हमको चाहिए वो आपसे क्यों?
सारी हसरत कारसाज़ों से रहेगी..
ये बुलंदी और ख़ुदी जो भी है यारब,
ज़िंदगी के साथ नाज़ों से रहेगी..
उर्मिला माधव
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