ख़ुद ही पता हूं
मेरी ज़िंदगी का मैं ख़ुद ही पता हूँ,
हक़ीक़त यही है कि मैं इक हवा हूँ,
सितम मुझपे कोई भला क्या करेगा,
मिरी सादगी की मैं ख़ुद ही सज़ा हूँ,
मैं हाज़िर हूं, लेकिन सही ये नहीं है,
मैं गुज़रे ज़माने का इक वाक़या हूँ,
मुझे ज़िन्दगी से अजब बे हिसी है
मैं मंज़िल से बिछड़ा हुआ रास्ता हूँ,
उर्मिला माधव
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