एक चिलमन सरकती रही रात भर
एक चिलमन सरकती रही रात भर,
आँख रह-रह के तकती रही रात भर,
रात रानी की खुशबू में डूबा जिगर,
सांस जिससे महकती रही रात भर,
एक अन्देशा सताता रहा बस मुझे,
ये पलक जो फड़कती रही रात भर,
मेरी धड़कन ने मुझको परीशां रखा,
हद से ज़ादा धडकती रही...रात भर,
कोई आया-गया भी नहीं इस तरफ,
रूह किसकी भटकती रही रात भर.....
उर्मिला माधव...
13.3.2016
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