तूने जो ज़ख़्म दिए हैं

तूने जो ज़ख़्म दिए हैं, नहीं भरने वाले,
याद करता है किसे अब तू बिखरने वाले,

बर्ग ए गुल का न कभी दर्द ही समझा कोई,
अब कहां तुझको रखूँ, दिल से उतरने वाले

गाम दर गाम रहा ग़म ही तमाशाई महज़,
ग़म से डरते हैं बहुत ग़म से न डरने वाले,
 उर्मिला माधव

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge