विचित्र किन्तु सत्य

विचित्र किन्तु सत्य 
🙂🙂🙂🙂🙂...

अपनी हैसियत से बढ़कर काम करने के क्या नतीजे हो सकते हैं ये आज जाना ,जबकि तबियत भी अच्छी ख़ासी नासाज़ है------
घर में एक आलमारी खिसकाने की पुरज़ोर कोशिश की लेकिन उसको तो हिलना ही नहीं था अगर हिली भी तो ग़लत जगह पर आगई,फिर वापस उधर नहीं गई ,बेचारी मेड मेरा मुंह देख रही थी क्यूंकि वो मना करती रही लेकिन हम क्यूँ मानने वाले थे,उस्तादी जो सर पर सवार थी,पिछले कई जन्मों में जो अलग-अलग नानियाँ रही होंगी सब याद आ रही हैं...क्या करें ओवर कोनफीडेंस जो था अपने बाहु बल पर .....अब क्या करें ??? :( --- तो बोलो सा रा रा रा .........

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge