तनहा खड़ी रही

तनहा खड़ी रही मैं समन्दर के बीच में,
तूफ़ान मुश्किलों के बवंडर के बीच में..

घर कह रहे थे सब जिसे वो घर कहां रहा 
कुछ दूरियां थीं मेरे और अंदर के बीच में,

बातों की शक़्ल हो गई यलगार की तरह,
गोया कि जुरअतें हों सिकंदर के बीच में...
उर्मिला माधव

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