ये मेरी हस्ती है

ये मेरी हस्ती है और मैं हूँ जनाब,
आपके कहने से होगी क्यूँ ख़राब,

देख कर ऐब-ओ-हुनर इनसान के,
क्या बजाते फिरते हो ये मुंह जनाब,

मैं भी गर कहने पे जो आ जाऊं तो,
आप क्या दे पायेंगे पूछूं जवाब ?

आप भी अपना गिरेबां झाँक लें,
तब समझ में आएगा,क्या हूँ नवाब ?

अपने हाथों से मसल कर आबरू,
क्यूँ बढ़ाते हैं मुसलसल यूँ अज़ाब,

क्यूँ किसीकी ठोकरों पर हो जहां,
आप ही को कोई समझे क्यूँ नवाब...
#उर्मिलामाधव...

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