सूटकेस ख़ाली है
मेरा अब सूटकेस ख़ाली है,
तेरी हर याद जो हटाली है,
वो जो चिठ्ठी थी इसके खीसे में,
इस बरस होली में जला ली है,
मुझको भाता नहीं है रंग-ए-गुलाल,
इसलिए खाक़ बस उड़ा ली है,
ग़म से तन्हाइयों से क्या डरना,
इनके संग बज़्म ही सजा ली है,
मैंने दुनियां का दिल नहीं तोड़ा,
यूँ भी हर शख़्स की दुआ ली है,
बेवफ़ा तुझको क्यूँ कहे कोई,
मैंने तोहमत ये ख़ुद लगा ली है,
दिल के कोने में एक बेढब सी,
अपनी दुनियां अलग बसा ली है,
उर्मिला माधव...
21 .3 .2016
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