चुपके चुपके रोना है
बस चुपके चुपके रोना है,
इस दिल को रोज़ भिगोना है,
बेचैन बहुत जो करता है,
वो उसका रूप सलोना है,
हम नहीं पुकारेंगे उसको,
जब हमको ग़म में खोना है,
ग़म सिसक रहे ज़ेरे मिज़्ग़ाँ,
आरिज़ को अश्क़ ही ढोना है,
हम देखें भी क्या दुनिया को,
आंसू की लड़ी पिरोना है..
जब नहीं रू ब रू वो मेरे
क्या ऐसा होना, होना है?
उर्मिला माधव
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