शिकायत कर पाओगे
तुम न शिकायत कर पाओगे, तुम इस दिल में रहते हो,
लोग समझते रहते हैं, बस तुम महफ़िल में रहते हो,
वक़्त मिला तो कभी तुम्हारे दर पर चलके आऊंगी,
अपना घर बतलाना मुझको किस मंज़िल में रहते हो,
लंबी दूरी, पर्दा दारी गफ़लत पैदा कर देती है,
अपनी करनी आप सम्भालो किस मुश्किल में रहते हो..
उर्मिला माधव
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