मुझको मतलब नहीं ज़माने से

मुझको मतलब नहीं ज़माने से,
आज आने से कल के जाने से,

तनहा रोते थे अश्क़ बारी थी,
क्या मआनी है मुंह दिखाने से,

जोड़ लो, तोड़ लो मिटा डालो,
कुछ न हासिल है दिल लगाने से,

झूट की इल्तिजा भी क्या सुननी,
किसको कहता है वो बहाने से,

अपना आपा ही हमको अच्छा है,
 हो भी क्या ग़लतियां गिनाने से..
उर्मिला माधव 

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