कितना इतराओगे
बे-वजह जिस्म पे कितना इतराओगे,
इतनी ख़ुद्दारी लेकर किधर जाओगे,
जिस्म किसका हुआ इस जहां में कहो,
हम भी मर जायेंगे,तुम भी मर जाओगे,
एक रक़्क़ासा बोली ये गिरते हुए,
इब्न-ए-मरियम नहीं जो संवर जाओगे,
रूह मरती नहीं जिस्म मर जाते हैं,
जिस्म से आशिक़ी करके पछताओगे,
इसका जुगराफिया जब बिगड़ता है तब,
दो क़दम साथ इसके न चल पाओगे,
उर्मिला माधव...
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