तुमको ख़बर नहीं है
तुमको ख़बर नहीं है कि टूटे कहां से हम,
अंदाज़ा कोई है भी के रूठे कहां से हम?
ख़ामोश रह के देखना उनके हज़ारों रंग,
हमको बताएं आके कि झूटे कहां से हम,
हम चल रहे थे उनके ही दामन को थाम कर,
समझे तलक भी वो नकि छूटे कहां से हम..
उर्मिला माधव
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