चर्चा जुबां तलक
लाते नहीं हैं क़ुफ्र का चर्चा ज़ुबां तलक,
मिलता नहीं था यार के दिल का निशां तलक,
जज़्ब-ए-जुनूं में पूछते फिरते थे हाल हम,
था होश तक नहीं,है मेरी हद कहाँ तलक,
वहशत थी चश्म-ए-नम थी,दिल-ए-ख़ाकसार था,
जाती ही कब थी मेरी सदा भी वहाँ तलक,
उर्मिला माधव
Comments
Post a Comment