बरपा किया है शोर सा

बरपा किया है शोर सा, इतना जहान में,
समझे नहीं कि हम हैं यहां किस मकान में,

दरया की ख़ुश्कियों ने दिखा दी है बानगी,
जब क़श्तियाँ भी उड़ने लगीं आसमान में,

हर कोई गिर रहा है,ज़मीं खींचती सी है, 
इस पर कमी कहां है किसी इत्मिनान में,

हमको गुमां नहीं है किसी आसमान का,
हम मोतबर कहाँ हैं किसी इम्तिहान में,
उर्मिला माधव 
13.1.2019

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