उदास लगता है

ख़ामख्वाह दिल उदास लगता है,
जिस्म ग़म का लिबास लगता है 

ये जहां भी अजीब उलझन है,
कब कोई ग़म शनास लगता है,

अपना आपा संभल सका जो कभी,
बस वही वक़्त ख़ास लगता है,
उर्मिला माधव 

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