डर गए हो तुम

मेरे जी से उतर गए हो तुम,
दिल मिरा ग़म से भर गए हो तुम,

वो जो जुरअत न  कर सका कोई
वो ही जुरअत तो कर गए हो तुम,

ख़ामियों से तुम्हारी वाकिफ़ हूँ,
मैंने समझा के डर गए हो तुम,

मेरी ख़ामोशियां ही बेहतर हैं,
सच तो ये है के मर गए हो तुम,
उर्मिला माधव

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