लफ़्ज़ों का करें हैं
खूब कारोबार लफ़्ज़ों का करें हैं,
दूसरों के घर में,जो झाँका करें हैं
तीलियां रख्खें हैं मुठ्ठी मैं दबाकर,
राख़ में चिंगारियां झोंका करें हैं,
कांच की दीवार वाले घर जिन्हों के,
वो ही पत्थर रात-दिन फेंका करें हैं,
दाग़ दामन में छुपाये डोलते हैं ,
दूसरों के गम पे जो थूका करें हैं,
खोल कर हैं दिल करें छींटाकशी जो,
वो ही अपनी बेर को रोका करें हैं
उर्मिला माधव...
17.1.2014...
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