सिर्फ़ मजबूती रखी हर गाम पे

हमने अपनी ज़िन्दगी के नाम पे,
सिर्फ़ मज़बूती रखी हर गाम पे,

दिल को जब तबियत हुई तो हंस लिया,
सोचना क्या इसमें सुब्हो शाम पे,

राब्ते तोड़े नहीं हमने बख़ुद,
टूट गए तो रोये कब अंजाम पे,

एक मुश्किल वक़्त था सो कट गया,
जब अकेले ही खड़े थे बाम पे,

रफ्तनी के वक़्त देखा जाएगा,
आह क्या भरना किसी इल्हाम पे...
उर्मिला माधव..
6.1.2016

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