मैं वो पत्थर हूं
मैं वो पथ्थर हूँ जिसे तुम तोड़ तो सकते नहीं,
और फिर आदत भी अपनी छोड़ तो सकते नहीं,
आओ फिर इस आग में तुम डूब जाना सीख लो,
खौलते दरिया का रुख़ तुम, मोड़ तो सकते नहीं,
तपते सहरा में दहकती रेत का अहसास है,
ये वो दुनियां है जहां सर फोड़ तो सकते नहीं
कुछ हुनर तो हाथ में हैं सिर्फ़ उस करतार के,
तोड़ने वाले भी, दिल को जोड़ तो सकते नहीं,
उर्मिला माधव
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