जले जाते हैं हम
आपके ग़म में जले जाते हैं हम,
आपसे मिलने चले जाते हैं हम,
उम्र भर सारे तमाशे देखकर भी,
झूठ बातों से छले जाते हैं हम,
सांस आती है हमेशा आज जैसी,
इस क़दर ग़म में गले जाते हैं हम,
सब्र का दामन संभाला उम्र भर ही,
अब इधर आ कर ढले जाते हैं हम,
Comments
Post a Comment