तस्वीर तो हटा दी
तस्वीर तो हटा दी अब कील रह गई है,
आंखों में अब हमारी इक झील रह गई है,
ये दिल है अब हमारा इक क़ब्र गाह जैसे
सब कुछ नहीं उजागर तफ़सील रह गई है,
जब तुमको देखना ही आंखों की रौशनी थी,
अब रौशनी नदारद कंदील रह गई है,
जब तक हवा चलेगी तब तक चलेंगे हम भी,
बस मरहलों की दूरी कुछ मील रह गई है.
कैसे खुरच के इसको हम दूर कर सकेंगे,
जो तुमने छाप दी थी वो सील रह गई है..
उर्मिला माधव
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