ख़ुद ब ख़ुद
पैदा किया है आलमे तनहाई ख़ुद बख़ुद,
देखी है हमने वहशते रुसवाई ख़ुद बख़ुद
जो-जो हुआ है वो ही तो होना था दोस्तो,
जब ज़िन्दगी के हो गए शैदाई ख़ुद बख़ुद,
इक फ़ासले के साथ ही चलने की ज़िद हुई,
मशहूर ख़ुद को कर दिया, हरजाई ख़ुद बख़ुद,
बेलौस चलते-चलते भी डरने लगे थे हम,
धड़कन हज़ार हादिसे ले आई ख़ुद बख़ुद,
दानिशवरों की भीड़ का हुज्जूम इक तरफ़,
हद-हद से बढ़ के आ गई दानाई ख़ुद बख़ुद,
इस उम्र भर की दौड़ का हासिल था एक दिन,
महशर के रोज़ बढ़ गई रानाई ख़ुद बख़ुद,
उर्मिला माधव
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