उसने पूछा भी नहीं

उसने पूछा भी नहीं,मैंने बताया भी नहीं,
वक़्त-ए-रुख़सत वो मुझे देखने आया भी नहीं,

आंखें झपकीं न गईं मुझ से बहुत देर तलक,
लोग ग़फ़लत में रहे,जिस्म उठाया भी नहीं...

आगया फिर वो निभाने को यूं ही रस्म-ए-चराग़,
कांपती लौ को हवाओं से बचाया भी नहीं,
उर्मिला माधव,

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