वक़्त भी ख़र्चा न किया

कोई हीलः न किया,कुछ भी तमाशा न किया,
मैंने बस इतना किया हश्र का जलवा न किया,

तेरी बातों की अदा मुझको धमक देती रही,
मैंने बस इतना किया गैर से चर्चा न किया...

तूने दुश्मन की तरह पूरे इरादे रख्खे,
मैंने बस इतन किया,यार को रुसवा न किया,

मुझसे लोगों ने कहा यार बहुत अहमक हो,
मैंने बस इतना किया,कोई भी शिकवा न किया...

गाम दर गाम मुझे लोग ख़बर करते रहे,
मैंने बस इतना किया कोई भी फतवा न किया.

तेरी मिहनत तो अदावत को हवा देती थी, 
मैंने बस इतना किया वक़्त भी ख़र्चा न किया...
उर्मिला माधव...
15.11.2014...

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