दूर का रिश्ता बहुत नज़दीक था

दूर का रिश्ता बहुत नज़दीक था,
जब तलक था दूर बिलकुल ठीक था,
::
कुछ निभाने में कमी होगी कहीं,
मामला रिश्तों का बस बारीक था,
::
यूँ कि ख़ुद मुख़्तार थीं नस्लें नई,
ये नतीजा किस्सा ए तसदीक था,
::
ग़ालिबन बातों की वो रस्साकशी,
हर इरादा मुद्दा ए तज़हीक था,
::
मुंह घुमाया और घर को चल दिए,
हर क़दम अपना भी एक तहरीक था....
::
#उर्मिलामाधव,
::
तस्दीक---- सत्यपन..
तज़हीक----हंसी उड़ाना
तहरीक-----आंदोलन.

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge