भला होगा
मैंने कुछ भी अगर कहा होगा,
उससे उसका कहाँ भला होगा,
वो जो अल्फ़ाज़ सिर्फ़ सुनता है
किस तरहा मुत्मइन रहा होगा,
उसको मज़मून से नहीं मतलब,
ध्यान मीज़ान पर धरा होगा,
वैसे इक ख़त जो मैंने भेजा है,
उसने महफ़िल में ही पढ़ा होगा,
ख़ुद तो पत्थर सा बन के बैठा है,
दिल भी पत्थर का ही बना होगा,
जो है आदत से अब भी हरजाई,
जाने वो किस तरहा बड़ा होगा,
उर्मिला माधव
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