शीशे में बाल आया हुआ
जा नहीं सकता कभी शीशे में बाल आया हुआ,
दिल भुला देगा कभी उनका ख़याल आया हुआ
जाने किस-किस शक्ल से उठती रही हैं उँगलियाँ,
जैसे मेरी सादगी पर हो सवाल आया हुआ,
ग़म शनासी की तलब करती नहीं बेचैन अब,
देख लीजे ज़िन्दगी में है कमाल आया हुआ,
कुछ लकीरों में रहेंगी ख़ामियां तकदीर की,
आसमां देखेगा बस दिल पर मलाल आया हुआ
उर्मिला माधव
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