कब चल पाओगे

तुम हमारी मुश्किलों के साथ कब चल पाओगे,
साफ़ कहते हैं के आधी राह पर रुक जाओगे,

कौन आख़िर चाहता है,उम्र भर जलता रहे,
गर तड़पते देख लोगे,तुम बहुत घबराओगे,

ज़ख़्म मत छेड़ो गुज़ारिश कर रहे हैं ऐ मियां,
ज़िद अगर कर जाओगे तो बाद में पछताओगे,

इक ज़माना हो गया,हम इश्क़ लिखते ही नहीं,
हम अगर लिख्खेंगे तुम ही दस तरह बल खाओगे

हम भी तो हर चंद ख़ुद को रोकते रहते हैं बस,
फिर भी ना माने तो ठंडी आग में जल जाओगे,
उर्मिला माधव,
2.11.2017

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