प्रेम की अभिव्यक्तियां

प्रेम की अभिव्यक्तियाँ स्पष्ट दर्शातीं हैं सब,
भावनाएं संकुचित हो दर्प कर पाती हैं कब?

अनवरत सम्मुख उजागर हों जहां अविरल प्रलाप,
रात्रि के अंतिम प्रणय का मर्म बतलाती हैं तब..

सूर्य की सब रश्मियों ने जब किया विस्मृत समय
तब किसीकी व्यंजनाएँ धैर्य धर पाती हैं कब?

कोई स्थितप्रज्ञ होकर भित्तियों सम होगया,
उसको वेदों की ऋचाएं ढूंढ कर लाती हैं तब...
उर्मिला माधव

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