ग़ैर के दिल पर हंसने वाले
गैर के दिल पै हंसने वाले,अपना दिल सहला कर देख,
उसमें भी कुछ दाग़ तो होंगे,थोड़ा अन्दर जा कर देख,
मिली-जुली कुछ हसरत होंगी,
थोड़ी हलकी भारी सी
ख़ूब क्या है ,ख़ामी क्या है,ख़ुद आवाज़ लगा कर देख,
झूठी बातें और मक्कारी,क़दम-क़दम पर हाज़िर रोज़,
कोई कहीं त-आल्लुक़ मत रख,अपना आप जगा कर देख,
दर्द बहुत हैं,खुशियाँ कम हैं,हर इक घर में आँखें नम हैं,
बरस पड़ेंगी वो सब आँखें, कोई बात चला कर देख,
खुद की ख़ातिर जीने वाले,दुनिया में इनसान बहुत,
हर दिल में झंकार मिलेगी,टूटा दिल बहला कर देख.....
उर्मिला माधव...
17.9.2014...
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